Makar Sankranti 2024 (मकर संक्रांति का इतिहास)

मकर संक्रांति 2024:

मकर संक्रांति का यह त्योहार पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है। सभी राज्यों में यह त्योहार भिन्न रूपो में मनाया जाता है। और सबकी अलग अलग मान्यता इस पर्व से जुड़ी हुईं है। इस दिन पतंग को आसमान में उड़ाने का अपना एक अलग ही महत्व होता है। उत्तर प्रदेश और बिहार में मकर संक्रांति को "खिचड़ी" के नाम से भी जाना जाता है। और दिन सभी के घरों में उड़द दाल और चावल की खिचड़ी भी बनाई जाती है, और दान भी की जाती है।

Makar Sankranti 2024

मकर संक्रांति का अर्थ:

इस दिन भगवान सूर्य दक्षिण से उत्तरायण की ओर यात्रा करते है। और ये एक शुभ समय होता है। और ऐसे में सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते है। दक्षिणायन को अंधकार और नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को रोशनी और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है।

मकर संक्रांति 14 January को ही क्यों मनाई जाती हैं?

कहा जाता हैं कि वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी महीने के चौदहवे या पंद्रहवे दिन ही पड़ता है, क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि में प्रवेश करता है। जैसा कि हमने ऊपर बताया की मकर संक्रांति का त्योहार कई राज्यों में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष के मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन मकर संक्रांति का यह पर्व मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति का त्योहार 15 January 2024 को मनाया जायेगा।

मकर संक्रांति धार्मिक कारण: मकर संक्रांति का यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर लोग जल में कुकुम आदि से भगवान सूर्य को अर्घ्य देते है, क्योंकि ऐसा करने से हमारे जीवन में सुख शांति सदैव बनी रहती है। मकर संक्रांति में स्नान और दान का विशेष महत्व रहता है। लोग अपने घरों में तिल और गुड़ के लडडू बनाते है, उड़द दाल और चावल की खिचड़ी बनाते है। 

मकर संक्रांति वैज्ञानिक कारण: सभी त्योहार के दो मतलब होते ही है सबकी अपनी मान्यता भी होती है। ऐसे ही मकर संक्रांति पर भी है वो ये को इस दिन पतंग उड़ने का भी अपना ही मजा होता है, महत्व है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दिन ठंडी ज्यादा होती है और लोग अगर Black Colour के वस्त्र पहनते है, क्योंकि वो रंग Heat ज्यादा देता है। संक्रान्ति के दिन सूर्य की किरणे औषधि प्रदान करती है, इसलिए पतंग उड़ाने का शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति महाभारत काल से क्यों जुड़ा है?

महाभारत काल में जब कोरवो और पांडवों का युद्ध चला उस युद्ध मे भीष्म पितामह बाड़ों को शैय्या पर लेटे अपने प्राण त्यागने की प्रतिक्षा कर रहे थे। उस समय की जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर यात्रा करना शुरू करे। ऐसा इसलिए की उस समय शरीर त्यागने वाले का पुनर्जन्म नहीं होता है, ऐसे लोग सीधा ब्रह्मलोक को जाते है, यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है।

शुभकामनाए:

"उत्तरायण के इस पावन पर्व पर, आपके जीवन में खुशियों का उड़ान भरे।
"गुड़ और तिल से मिलकर बनी मिठाई की तरह, आपके जीवन में मिठास और प्यार बना रहे।
"उड़ते पतंग की तरह, आपके जीवन में खुशियां और संघर्ष पर विजय की ऊँचाई तक पहुँचे।
"सूर्य का उदय हर दिन नया सवेरा लाए, वृद्धि और समृद्धि का संकेत दिखाए। मकर संक्रांति की ढेर सारी शुभकामनाएं।"

Conclusion: आज हमने इस पोस्ट में आपको मकर संक्रांति के बारे में बताया है। इसके पीछे के इतिहास क्या है वो भी बताया है। अगर आपको इस पोस्ट में कोई कमी रह गई है तो कृपया आप मुझे कमेंट करे। हम उस पर सुधार करेंगे।

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-Varsha

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