Bharatiya Mahila Mukti divas (सावित्रीबाई फुले जयंती)
Savitribai Phule Jayanti 2024:
सावित्रीबाई फुले की जयंती के उपलक्ष्य में 3 जनवरी को महिला मुक्ति दिवस मनाया जाता है। सावित्रीबाई ने अपना पूरा जीवन एक मिशन की तरह जीया है, विधवा स्त्री का विवाह कराना, लड़कियों की पढ़ाई पर जोर देना, महिलाओं की मुक्ति और छुआछूत को खत्म करना आदि जैसे कार्य किए है। और इन सभी कार्यों में इनके पति ज्योतिराव फुले ने अहम भूमिका निभाई है। और ऐसा करने में इन्हे कई तरह की सामाजिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
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| भारतीय महिला मुक्ति दिवस |
भारत की पहली शिक्षित महिला:
1848 में भारत की पहली शिक्षित महिला सावित्रीबाई फुले थी। सावित्रीबाई फुले महाराष्ट्र की एक समाज सुधारक और शिक्षाविद् थी। वह लड़कियों और उनके समाज के लिए एक मिसाल बन कर सामने आई। उन्होंने अपनी पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उनके लिए गांव में एक स्कूल भी खोला और स्वयं शिक्षित भी किया।
और इस तरह उन्होंने देश की कई गरीब महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य किया है। इसलिए उनकी याद में जन्मदिवस के रूप में महिला मुक्ति दिवस मनाया जाता है।
सावित्रीबाई फुले की पढ़ाई:
1840 में 9 वर्ष की अल्पायु में ही उनका विवाह ज्योतिराव फुले के साथ कर दिया गया था, उस समय उनकी भी उम्र १३ वर्ष थी। सावित्रीबाई फुले का मन पढ़ने लिखने में ज्यादा रहता था, और उनकी इसी लगन से प्रभावित होकर ही उनके पति ने उनको आगे पढ़ाया। सावित्रीबाई फुले ने अहमदनगर और पुणे में teacher training को पूरा किया और एक योग्य शिक्षिका बनी। और बाद में सामाजिक न्याय और महिला मुक्ति के कार्यों में जुट गई थी।
रूढ़िवादी सोच का बदलना:
कहते है की जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। सावित्री बाई फुले ने अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर जातिवाद व्यवस्था, समाज विरोधी ताकतों के खिलाफ लड़ाई लड़ कर महिलाओं की शिक्षा मुक्ति के लिए क्रांतिकारी अभियान को चलाया। और इस तरह इनके मार्ग में कई तरह की बाधाएं आई।
अंत में फिर स्कूल खोले और लाखो लोगो को शिक्षित कर उनका जीवन रोशन किया, उनके लिए उनके मन आशा की किरण जगाई। लोगो ने स्कूलों में जाकर पढ़ना शुरू क्या। और इस तरह से रूढ़िवादी सोच का बदल दिया।
आज के समय में महिलाए पुरुषो की बराबरी कर रही है। चांद तक पहुंच चुकी है आज की महिलाए, ये सब किसकी इन्ही की दी हुई देन है।
सुझाव: आज इस नव वर्ष पर हम तो आज भी यही कहना चाहेंगे कि महिलाओं को पढ़ाओ और लिखाओ उन्हें काबिल बनाओ की वो अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। जो औरते आज भी जल कर मर रही है, वजह चाहे जो भी हो अगर पढ़ लिख कर समझदार है तो ये कायर वाला काम कभी भी करने का नही सोचेंगी। अपना Stand खुद ले सकती है।
Thanks
Varsha

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